हरियाणा: फरीदाबाद नगर निगम के वार्ड 25 के पार्षद सीमा सुमन्त चंदेल सबसे नकारा सबसे निक्कम्मे क्यों है ? वार्ड 25 की निगम सदस्या के पति को ठेकेदार पति क्यों कहा जाता है ? उन पर झूठ बोलने और ड्रामेबाजी के आरोप क्यों लगते है ? यह जानने के लिए आपको समझना होगा, कि सुमन्त चंदेल मुलतः बिहार के रहने वाले है, करीब 20 साल पहले रोजी रोटी की तलाश में फरीदाबाद आये थे। फरीदाबाद में राजनीति करने के लिए पहले कागेंस के साथ जुडे, उनकी कार्यशैली के कारण उनको जगह नही मिली तो आम आदमी पार्टी का दामन थामा, कुछ सालों तक आम आदमी पार्टी में धक्के खाने के बाद स्थानीय भाजपा नेता ओमप्रकाश के साथ लग गये, उनके लिए दरी बिछाते, कुर्सियाॅ लगाते नजर आते, लेकिन जब भी चुनाव आता नाराज हो जाते, चुनावों के दौरान उन्हे कुछ दे-लेकर मना लिया जाता, जिसके चलते उनकी छवि धूमिल होती गयी। लिहाजा पूर्व पार्षद ओमप्रकाश रक्षवाल ने अपने आफिस से भगा दिया। इसके बाद सुमन्त चंदेल ने राज्यमंत्री राजेश नागर का दामन थामा और उनके विधायकी के चुनाव में उनके साथ लग गये। दरअसल राज्यमंत्री राजेश नागर और ओमप्रकाश रक्षवाल के आपसी तालमेल की कमी का फायदा समुन्त चंदेल ने उठाया और मंत्री के खेमे में शामिल होकर मंत्री के छोटे भाई सुधीर नागर को विधायक का सपना दिखा दिया, जब उन्होने छठ घाट पर एक कार्यक्रम किया तो उसमे सधीर नागर को विधायक बनाने का नारा लगा दिया, इसी के चलते सुधीर नागर ने सुमन्त चंदेल का नाम पार्षद प्रत्यासियों की लिस्ट में डाल दिया। टिकट वितरण पर आखिरी मुहर केन्द्रीय मंत्री कृश्णपाल गुर्जर को लगानी थी, तभी चालाकी से केन्द्रीय मंत्री से मिलीभगत कर टिकट लेने में सफलता हासिल कर ली, यानि एक तरफ राजेश नागर तो दूसरी तरफ कृश्णपाल गुर्जर को उनका खास बनने का सफल ड्रामा किया, और पार्षद बन गये। उसके बाद जनता से जो वादा किया था उसमें वो फेल होने लगे, गलियों और मुख्य सड़कों पर गंदगी व कूड़े का ढेर लगने लगे, नालियों की सफ़ाई न होने से बदबू और मच्छरों की भरमार हो गयी, टूटी सड़कें और जलभराव की समस्या ने लोगो का जीना मुश्किल कर दिया, रात में बंद स्ट्रीट लाइटें या कहा जाए की लाइट नहीं होने पर सुरक्षा पर असर पड़ने लगा, नागरिकों की शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं, जनता के सवालों का जवाब कौन देगा ? वार्ड 25 के लोगों ने अपने पार्षद से बड़ी उम्मीदें रखी थीं, साफ़ सड़कें, बेहतर सफ़ाई व्यवस्थाए रोशनी से जगमग गलियां और विकास से भरा इलाका लेकिन वक्त बीतने के साथ ये उम्मीदें धुंधली पड़ती जा रही हैं। झूठ बोलने, आडम्बरबाजी के कारण उनकी छबि खराब होती जा रही है। पूर्वाचंल के लोगो का अपमान, अभिमान की पराकाष्ठा, भर्ष्ट मानसिकता, अवैध बसूली या कहा जाये कि लालच के वषीभूत उनकी कार्यशैली खराब होती ही जा रही है, इसलिए उनको अब सबसे नकारा सबसे निक्कम्मा कहा जाने लगा है। इनके इन कार्यशैली से राज्यमंत्री राजेश नागर की छवि को भी लगातार नुकसान हो रहा है I सुमंत चंदेल की बेहूदी, तर्कविहीन, झूठी, चालबाजियों से भरी भाषणबाजी तथा छल, कपट, ईर्ष्या, अभिमानी मानसिकता की कार्यशेली उनकी छवि में ग्रहण लगा रही है I वार्ड 25 पार्षद ठेकेदार पति कुछ खास काम नहीं करवा पा रहे है, नाली के सड़क बनवाने का वादा भी खोखला निकला। ऑफिस में बैठकर दिखावा ऐसा करते है जैसे ये कितने बड़े अधिकारी बन गए हो। अभिमान के मारे गर्दन सीधी नहीं होती। हमेशा गुरूर से भरे रहते है। जनता का अपमान, समर्थकों को बेइज्जत करना आम बात है। चुनाव के चार महीने बाद से ही घर ऑफिस नया बनने लगा है। जो सवालों के घेरे में है। भ्रष्टाचार की आशंका को बल मिलता है। ठेकदार कमीशन मांगे जाने के भय से काम लेने को तैयार नहीं है।