सेवानिवृत्त शिक्षक ललित के विरुद्ध दर्ज कराई झूठी एफआईआर

भ्रश्टाचार के खिलाफ लडना, जनहीत के लिए आवाज उठाना, एक ईमानदार व्यक्ति के लिए कितना मुष्किल भरा हो सकता है, यह बात ललित भारद्धाज से ज्यादा कौन जान सकता है, सेवा निर्वित होने के बाद भी भ्रश्ट तंत्र के भ्रश्टाचारी ललित का पीछा छोडने को तैयार नही है। भ्रश्ट अधिकारियों ने मिलीभगत करके सेवा निर्वित हो चुके ललित भारद्धाज के खिलाफ धारा 420 के तहत झूठा और मनगढंत मामला दर्ज करवाकर अपने भ्रश्ट आचरण की ताकत का एहसास ही नही कराया ब्लकि हरियाणा षिक्षा विभाग की भ्रश्ट कारगुजारियों पर मौहर लगा दी है। पहले आपको बता देते है कि आखिर मामला क्या है। दरअसल ललित भारद्धाज का नाम पहले लाला राम हुआ करता था जिस नाम से उन्होने 10 वी 12 वी और बीए पास किया उसके बाद 1987 में भारतीय सेना में भर्ती हो गये, सेना में रहते 1991 में लाला राम ने अपना नाम नियमानुसार बदल कर ललित भारद्धाज रख लिया इसके बाद 1994 में सेना में रहते नियमानुसार बी0एड की परिक्षा पास कर ली भारतीय सेना में 12 साल तक नौकरी करने के बाद 31 दिसम्बर 1999 को नौकरी छोड कर 18 दिसम्बर 2004 को षिक्षा विभाग में ललित भारद्धाज ने नौकरी ज्वाईन करली। षिक्षा विभाग में नौकरी के दौरान ललित भारद्धाज ने षिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रश्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी षुरू कर दी जिसके तहत सेहतपुर सरकारी स्कूल में यतेन्द्र षास्त्री की देखरेख मंे बनाये स्कूल के कमरों में करोडो का गवन हुआ जिसकी षिकायत ललित भारद्धाज ने की जिसमें 40 लाख रूप्ये की रिकवरी और मुकदमा दर्ज हुआ, गरीब बच्चो की डे्र्रस, काॅपी किताबों के पैसों में हेरा फेरी कर किये भ्रश्टाचार के खिलाफ ललित भारद्धाज ने यतेन्द्र षास्त्री को सस्पेड कराया, तथा अन्य अधिकारी भी इस भ्रश्ट तंत्र का हिस्सा पाये गये जो एक समूह बनाकर सरकारी धन की लूट करते थें माना जाता है कि सेवार्निवित हो चुकी डिप्टी डी0ओ0 अनीता षर्मा बखास्त डिप्टी सुपरीडेंट दीपक कपूर, मास्टर यतेन्द्र षास्त्री, अस्सिटेंट डायरेक्टर हरिता मलिक, डिप्टी डायरेक्टर षंकुतला षिन्धू ने मिलकर बदले की भावना से ललित भारद्धाज के खिलाफ नियमानुसार नाम बदलने की बात को छिपाकर फर्जी दस्ताबेजों के आधार पर नौकरी पाने का मामला बनाकर ललित के खिलाफ 420 का मुकदमा दर्ज करवा दिया, वो भी तब जब ललित रिटार्यर हो चुके है पिछले दषकों से लगातार ललित के खिलाफ षिकायते दर्ज होती रही है जिनमे ललित हर बार निर्दोश साबित हुए है जबकि उक्त सभी अधिकारी किसी ना किसी मामले में दोशी माने गये है भ्रश्टाचार के पैसो की रिकवरी तक हुई है। 1988 में धोखाधडी कर षिक्षक नियुक्त हुई अनीता षर्मा 1995 में बखास्र्त हुई हाईकोर्ट से स्टे लेकर नौकरी पूरी कर ली। पदोन्नती भी ली। दीपक कपूर फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने वालों की लिस्ट में थे इन्हे भी बर्खास्त किया जा चुका था। एफ0आई0आर भी दर्ज हुई। मास्टर यतेन्द्र षास्ती, अनिता षर्मा, दीपक कपूर तीनों षिक्षा विभाग के भ्रश्टाचार के आयने है इनके पीछे पूरे षिक्षा विभाग के चप्पे चप्पे पर भ्रश्ट अधिकारियों का पहरा है। ललित भारद्धाज ने जब इनके भ्रश्ट आचरण का कवच हटाने का प्रयास किया तो खुद ललित को ही झूठे मामलों में फसाने का जाल बुना गया जब नियमनुसार नाम बदलकर ललित ने बीएड की डिग्री लो जिसकी विभागीय जाॅच कई बार हो चुकी ललित निर्दोश साबित हुए तो भी एक बार फिर मुकदमा दर्ज कर लिया जाना भ्रश्ट अधिकारियों के असल सच को उजागर करता है। भले ही ललित के पास वो दस्ताबेज हो जो ललित भारद्धाज को निर्दोश साबित करते है परन्तु मुकदमा दर्ज कर उनकी ईमानदार छवि को दागदार बनाने की मंषा भ्रश्ट अधिकारियों की पूरी होती है। सवाल ध्रतराश्ट रूपी उन उच्च अधिकारियों और नेताओं पर भी उठते है जो षिक्षा विभाग के इस महाभ्रश्टाचार के युद्ध को बेठे देख रहे है। जिन्हे पता है कि षिक्षा विभाग आकंठ भ्रश्टाचार में डूब रहा है बावजूद उसके उन्हे इसकी भनक तक नही है। यतेंन्द्र षास्ती जैसे मास्टर जिन्होने गरीब बच्चों की डे्रस काॅपी किताब पेंसील का पैसा डकार लिया हो जाॅच में रिकवरी बनने के बाद भी पैसा नही लौटाया हो उसे प्रमोषन दिये जाते रहे, आज स्कूलों की जो हालात है वो षिक्षा विभाग में व्यपक भ्रश्टाचार होने का जीता जागत प्रमाण है। जाॅच षिक्षा विभाग के अधिकारियों को करनी है, कार्यवाही षिक्षा विभाग के अधिकारियों को करनी है। जब अधिकारी ही भ्रश्टाचारी है तो न्याय और निषपक्षता की उम्मीद कौन करेगा। ललित जैसे ईमानदार लोगो की आवाज कौन सुनेगा। भ्रश्ट विभाग में रहकर ईमानदार बनने की गुस्ताकी की सजा तो ललित को मिलेगी। लेकिन क्या असल सच सामने आयेगा क्या जीत सत्य की होगी ये देखना होगा इसे देखने के लिए आपको देखते रहना होगा सत्यहुंकार हम लेते है